Thursday, 1 October 2020

आलेख

 


"चीन"
सन 2013 से 2023 तक चीन में , कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्य के पुत्र श्री शी जिनपिंग की नियुक्ति तय है व आगे भी उनके चीन के प्रमुख बने रहने की पूर्ण संभावना है । जिसके समस्त कानूनी बदलाव कर लिए गए हैं । शी जिनपिंग के राष्ट्रपति शासन काल मे चीन की विस्तार वादी नीतियों को हवा मिली , जिसके रहते चीन ने अपने चारों ओर बलपूर्वक कब्जा कर क्षेत्र विस्तार की नीति को अपनाया , भारत , ताइवान , जापान , नेपाल आदि कई मुल्क चीन की इस विस्तार वादी नीतियों से परेशान है और अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए युद्ध करने को बाध्य है ।
चीन की इस विस्तार वादी नीति से उसे वैश्विक स्तर पर आर्थिक व सामाजिक नुकसान पहुंचना भी तय है , क्योंकि पीड़ित पक्ष चीन से किसी भी प्रकार का कोई लेन देन आर्थिक व सामाजिक नहीं रख पाएगा ।
चीन का अड़ियल रुख , यूनाइटेड नेशन में लगातार भारत का विरोध , आतंकवाद को समर्थन , अपनी बातों पर कायम ना रहना व कब्जा नीति पूरी दुनिया में चीन की छवि को खराब कर रही है । जिसके चलते पूरे विश्व में चीनी लोगों की साख लगातार गिर रही है । शी जिनपिंग की नीतियां से चीन वैश्विक स्तर पर अपनी साख खोता जा रहा है । वहीं विश्व के ज्यादातर देश उसके खिलाफ लामबंद हो गए हैं । हांगकांग का मसला हो ताइवान का मसला हो या भारत का मसला हो चीन अपने रुख में बदलाव करने को तैयार नहीं है ।
इस कोरोना काल में पूरा विश्व कोरोना संकट से जूझ रहा है तथा इस संकट को भी चीन की ही देन माना जा रहा है । इस महामारी के कारण दुनिया के सभी देशों में लाखों लोग मर रहे हैं । इसके विपरीत चीन का रुख समझ से परे है । अंत में बस यही कहना उचित होगा कि आने वाले भविष्य में चीन की विस्तार वादी नीति अड़ियल रुख और आतंक को समर्थन उसे वैश्विक समाज से बिल्कुल अलग कर देगा ।

(स्वरचित)

विवेक आहूजा
बिलारी
जिला मुरादाबाद
@9410416986

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