आज पूरे विश्व में कोरोना का प्रकोप अपने भयावह रूप में जारी है ।हर देश और प्रत्येक व्यक्ति इससे त्रस्त है । इसका प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और प्रत्येक व्यक्ति इससे बाहर निकलने की कोशिश में लगा हुआ है ।लाखों की तादाद में लोग मर रहे हैं लेकिन इससे बचने के उपाय अभी नजर नहीं आ रहा हैं ।
इस कोरोना काल में दो तरह की धारणाएं पूरे विश्व में काम कर रही हैं। एक धारणा के अंतर्गत वह लोग आते हैं जो अपने घरों में छुप कर बैठे हैं और अपने परिवार को भी घर के अंदर दुबका के रखा हुआ है। इस धारणा के व्यक्ति बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं जितना सामान घर पर उपलब्ध है उसी से ही काम चल जाए, अगर इसके अतिरिक्त भी कोई रास्ता ना हो तभी वह घर से बाहर निकलते हैं। असल में यह वही लोग हैं जो सरकार द्वारा निर्देशित गाइड लाइन पर ही चल रहे हैं और इस बीमारी की गंभीरता से डरे हुए है ।इसके अलावा करोना कॉल में दूसरी धारणा भी काम कर रही है जिसे मानने वाले लोग सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं, जरूरी ना होने पर भी छोटी-छोटी चीजों के लिए बाजारों में पहुंच जाते हैं, अपने बच्चों को स्कूटर पर घुमा रहे हैं अगर सच पूछो तो इस धारणा को मानने वाले लोग सरकार द्वारा निर्देशित गाइडलाइन के बिल्कुल विपरीत चल रहे हैं। इनका मानना है कि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है इससे कुछ नहीं होगा ,हम बहुत स्ट्रांग हैं ,असल में इसी धारणा के 80% व्यक्ति ही कोरोना पॉजिटिव होकर अस्पतालों की शोभा बढ़ा रहे है, और बाकी लोगों को भी मुसीबत में डाल रहे हैं ।
अतः आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है की प्रथम धारणा को ही अपनाएं घर बैठे, जरूरी होने पर ही निकले, सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करें, और स्वस्थ रहें ।अन्य दूसरी धारणा का पालन करने पर आप कब संकट में पड़ जाएंगे कुछ कह नहीं सकते।
"बाकी आपकी मर्जी"
(स्वरचित)
विवेक आहूजा
बिलारी
जिला मुरादाबाद
Vivekahuja288@gmail.com
इस कोरोना काल में दो तरह की धारणाएं पूरे विश्व में काम कर रही हैं। एक धारणा के अंतर्गत वह लोग आते हैं जो अपने घरों में छुप कर बैठे हैं और अपने परिवार को भी घर के अंदर दुबका के रखा हुआ है। इस धारणा के व्यक्ति बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं जितना सामान घर पर उपलब्ध है उसी से ही काम चल जाए, अगर इसके अतिरिक्त भी कोई रास्ता ना हो तभी वह घर से बाहर निकलते हैं। असल में यह वही लोग हैं जो सरकार द्वारा निर्देशित गाइड लाइन पर ही चल रहे हैं और इस बीमारी की गंभीरता से डरे हुए है ।इसके अलावा करोना कॉल में दूसरी धारणा भी काम कर रही है जिसे मानने वाले लोग सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं, जरूरी ना होने पर भी छोटी-छोटी चीजों के लिए बाजारों में पहुंच जाते हैं, अपने बच्चों को स्कूटर पर घुमा रहे हैं अगर सच पूछो तो इस धारणा को मानने वाले लोग सरकार द्वारा निर्देशित गाइडलाइन के बिल्कुल विपरीत चल रहे हैं। इनका मानना है कि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है इससे कुछ नहीं होगा ,हम बहुत स्ट्रांग हैं ,असल में इसी धारणा के 80% व्यक्ति ही कोरोना पॉजिटिव होकर अस्पतालों की शोभा बढ़ा रहे है, और बाकी लोगों को भी मुसीबत में डाल रहे हैं ।
अतः आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है की प्रथम धारणा को ही अपनाएं घर बैठे, जरूरी होने पर ही निकले, सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करें, और स्वस्थ रहें ।अन्य दूसरी धारणा का पालन करने पर आप कब संकट में पड़ जाएंगे कुछ कह नहीं सकते।
"बाकी आपकी मर्जी"
(स्वरचित)
विवेक आहूजा
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जिला मुरादाबाद
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